इस ब्लॉग के हेडर के चित्र गंगाजी या शिवकुटी घाट से सम्बन्धित हैं। गर्मियों के समय – अप्रेल/मई में गंगा उस पार या बीच के उग आये द्वीपों पर खरबूजा, तरबूज, नेनुआ, लौकी, करेला आदि की खेती करते हैं इस पार के चिल्ला में रहने वाले मल्लाह और अन्य जाति के लोग। उस पार से इस पार सब्जियां/फल लाने का काम वे नाव या ऊंट से करते हैं। नाव से लाने के चित्र हैं ये, जो सवेरे की सूरज की रोशनी में एक 3 मेगापिक्सल वाले मोबाइल के कैमरे से भी ठीकठाक आ गये हैं। इन चित्रों से इस ब्लॉग के हेडर बन गये हैं।


शिवकुटी घाट पर उतरने के लिये सीढ़ियाँ बनी हैं। उतरते समय दाईं ओर कोटेश्वर महादेव का मन्दिर है और मन्दिर के एक कोने पर है नीम का बड़ा सा पेड़। सीढ़ियों के नीचे पण्डा श्री स्वराज कुमार पाण्डेय बैठते हैं अपनी चौकी पर। सीढ़ियों की उतरान के बाईं ओर एक परित्यक्र इन्दारा है और उसके सामने जमीन पर बैठता है जवाहिरलाल। वह सवेरे देर तक मुखारी करता पाया जाता है। यह चित्र भी हेडर में प्रयोग करता हूं मैं।
एक चित्र हाथ से मछली पकड़ते बच्चों का है - 

Well documented…
अच्छे चित्रों के लिए अच्छा कैमरा नहीं, अच्छी दृष्टी चाहीये होती है! इन चित्रों की खासियत इनकी वास्तविकता है, कोई कृत्रिमता नहीं , कोई बनावटीपन नहीं, सभी अपनी जिन्दगी में व्यस्त !
सुन्दर चित्र और वक्तव्य दोंनो